हथियार डालना चाहते हैं हिडमा के खात्मे के बाद नक्सलियों में हलचल, महाराष्ट्र CM को लिखी चौंकाने वाली चिट्ठी

On: November 24, 2025 7:04 AM
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CM देश में नक्सलवाद के खिलाफ जारी बड़े और निर्णायक अभियान के बीच एक अहम मोड़ आ गया है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सक्रिय MMC (महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़) स्पेशल जोनल कमेटी के नक्सलियों ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी।
पहली बार, इस पूरे ज़ोन के नक्सलियों ने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखकर सामूहिक सरेंडर की इच्छा जताई है।

यह कदम उस समय आया है जब सुरक्षा एजेंसियों ने हाल के महीनों में नक्सलियों की कोर लीडरशिप पर बड़ी कार्रवाई की है, खासकर हिडमा के खात्मे ने पूरे तंत्र को हिला दिया था। अब ऐसा लगता है कि नक्सलियों का मनोबल टूट चुका है और वे हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की ओर बढ़ रहे हैं।

तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भेजा चौंकाने वाला पत्र

MMC जोन के नक्सलियों ने पत्र महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साईं को भेजा है।
इस चिट्ठी में उन्होंने साफ लिखा है कि वे लंबे समय से जारी हिंसा और संघर्ष से थक चुके हैं और अब समूह में सरेंडर करना चाहते हैं।

नक्सलियों ने इस पत्र में अपने दो पुराने साथियों—भूपति (महाराष्ट्र) और सतीश (छत्तीसगढ़)—का जिक्र किया है, जिन्होंने हाल ही में सरेंडर कर दिया था। दोनों के मुख्यधारा में लौटने से संगठन के बाकी सदस्यों को भी बड़ा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ा।

15 फरवरी 2026 तक ‘नो ऑपरेशन’ की मांग

नक्सलियों ने पत्र में एक बड़ी शर्त रखी है।
उन्होंने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कहा है कि 15 फरवरी 2026 तक सुरक्षा बलों को कोई ऑपरेशन नहीं करना चाहिए।

उनका कहना है कि वे अपनी टीम के सभी सदस्यों से बात करके अंतिम निर्णय लेना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें समय चाहिए, ताकि हर सेक्शन, कमांडर और छोटे दलों से संपर्क हो सके।

साथ ही नक्सलियों ने यह भी अनुरोध किया है कि कुछ दिनों के लिए न्यूज़ नेटवर्क को ब्लॉक या सीमित कर दिया जाए, जिससे उनका संवाद प्रभावित न हो।

PLGA वीक नहीं मनाने का वादा

हर साल नक्सली संगठन दिसंबर में PLGA वीक (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी वीक) मनाते हैं, जो उनका सबसे बड़ा वार्षिक कार्यक्रम माना जाता है।
लेकिन इस बार नक्सलियों ने पत्र में खुद कहा है कि वे PLGA हफ्ता नहीं मनाएंगे

यह एक बड़ा संकेत है कि संगठन का अंदरूनी मनोबल कमजोर पड़ा है और वे संघर्ष की राह छोड़कर बातचीत की ओर आना चाहते हैं।

नक्सलियों ने यह भी बताया है कि वे जल्द ही एक और पत्र भेजकर मास सरेंडर की निश्चित तारीख की घोषणा करेंगे।

केंद्र सरकार के मिशन के भीतर है प्रस्तावित समय सीमा

नक्सलियों द्वारा मांगी गई 15 फरवरी 2026 की डेडलाइन देखने में लंबी लग सकती है, लेकिन सरकार के नजरिये से यह बेहद महत्वपूर्ण है।
केंद्र सरकार ने पहले ही 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है।

अगर तीनों राज्य सरकारें यह समय देती हैं और सामूहिक सरेंडर सफल होता है, तो यह नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में ऐतिहासिक सफलता साबित हो सकता है।

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हिडमा के खात्मे का असर: नक्सली तंत्र में बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका

नक्सली संगठन PLGA का टॉप कमांडर हिडमा कई सालों तक नक्सल हिंसा का सबसे बड़ा चेहरा रहा।
उसके खात्मे को सुरक्षा बलों ने सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना।

इस कार्रवाई के बाद:

  • नक्सलियों की कमांड स्ट्रक्चर ढह गया
  • छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र बॉर्डर पर मूवमेंट बेहद सीमित हो गया
  • कई पुराने कैडर संगठन छोड़ने लगे

हिडमा के मारे जाने के बाद पहली बार इतना बड़ा समूह सरेंडर की बात कर रहा है।

तीन राज्यों में सुरक्षा एजेंसियों की सफल बनती रणनीति

पिछले दो सालों में तीन राज्यों की संयुक्त रणनीति ने नक्सलियों को काफी हद तक दबाव में ला दिया है:

  • जंगलों में लगातार कॉम्बिंग
  • तकनीक का बढ़ा हुआ इस्तेमाल
  • बेहतर इंटेलिजेंस नेटवर्क
  • सरेंडर पॉलिसी को आकर्षक बनाना
  • नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों को तेज करना

इन कदमों ने बड़े स्तर पर नक्सलियों की ताकत कम की।

नक्सलियों का पत्र: क्या यह ईमानदार कदम है या समय लेने की रणनीति?

विशेषज्ञों की राय इस मामले में दो तरह की है।

कुछ इसे सकारात्मक कदम मानते हैं:

  • संगठन अंदर से टूट चुका है
  • लगातार ऑपरेशंस से दबाव बना है
  • नये युवाओं की भर्ती लगभग बंद हो चुकी है
  • स्थानीय लोगों ने समर्थन देना कम किया है

कुछ विशेषज्ञ सतर्क रहने की सलाह देते हैं:

  • हो सकता है यह सिर्फ वक्त पाने की रणनीति हो
  • ऑपरेशन रोकने से नक्सली खुद को रि-ग्रुप करने की कोशिश कर सकते हैं
  • न्यूज नेटवर्क बंद करने की मांग संदिग्ध लगती है

सरकार इस पूरे मामले का विश्लेषण सावधानी से कर रही है।

अब आगे क्या? बड़े फैसले की तैयारी

आने वाले हफ्तों में तीनों राज्यों की सरकारें और सुरक्षा एजेंसियां यह तय करेंगी कि:

  • नक्सलियों को मांगी गई समय सीमा दी जाए या नहीं
  • ‘नो ऑपरेशन’ जैसी मांगों पर किस हद तक सहमति बन सकती है
  • सरेंडर प्लान को कैसे सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से लागू किया जाए

सरकारी सूत्रों के अनुसार, किसी भी तरह का निर्णय सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट पर आधारित होगा।

अगर यह सरेंडर सफल होता है तो क्या बदलेगा?

अगर MMC जोन के नक्सली सामूहिक रूप से हथियार डालते हैं, तो:

  • देश में नक्सल हिंसा में बड़ी गिरावट आएगी
  • तीन राज्यों के कई जिले “नक्सल मुक्त क्षेत्र” बन जाएंगे
  • आम लोगों की सुरक्षा और विकास योजनाएं तेज होंगी
  • सुरक्षा बलों का बोझ काफी कम होगा
  • केंद्र का “नक्सल फ्री इंडिया” लक्ष्य पूरा होने की कगार पर पहुंच जाएगा

यह सफलता बीते 40 सालों में नक्सलवाद के खिलाफ सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाएगी।

नक्सलवाद के अंत की शुरुआत?

MMC जोन के नक्सलियों द्वारा लिखा गया यह पत्र सिर्फ सरेंडर की इच्छा नहीं, बल्कि नक्सल आंदोलन की दिशा बदलने वाला संकेत है।
हिडमा के खात्मे के बाद नक्सल नेतृत्व बिखर चुका है और अब पहली बार इतने बड़े स्तर पर सामूहिक आत्मसमर्पण की बात हो रही है।

अगर सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इसे सही दिशा में संभालती हैं, तो 2026 भारत के इतिहास में नक्सलवाद के अंत की शुरुआत के रूप में दर्ज हो सकता है।

Vivek Thakur

Vivek Thakur, Founder of Bihar Career, शिक्षा व करियर गाइडेंस से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी युवाओं तक पहुँचाने वाले passionate blogger हैं।

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