Dubai-Airshow हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले का शांत और खूबसूरत गांव पटियालाकड़ शुक्रवार दोपहर अचानक शोक और सदमे से भर गया. गांव के लोगों को जैसे ही खबर मिली कि उनके बेटे, 34 वर्षीय विंग कमांडर नमांश स्याल की दुबई एयर शो में प्रैक्टिस के दौरान मौत हो गई, पूरा इलाका स्तब्ध रह गया. देश का यह बहादुर पायलट तेजस फाइटर एयरक्राफ्ट उड़ा रहा था और अचानक हुए क्रैश में उसकी जान चली गई. कुछ ही मिनटों में गांव के लोग अपने-अपने काम छोड़कर स्याल के घर की ओर दौड़ पड़े. वातावरण में बस एक ही बात गूंज रही थी—“हमारा बेटा चला गया।”
विंग कमांडर नमांश स्याल की शहादत ने कांगड़ा घाटी ही नहीं, पूरे हिमाचल और पूरे देश को झकझोर दिया है. एक होनहार, अनुशासित और साहसी पायलट की जिंदगी यूं अचानक खत्म हो जाना लोगों के दिल को चीर गया है. लेकिन साथ ही गांव, जिला और राज्य के हर व्यक्ति की आंखों में गर्व भी साफ झलकता है—क्योंकि देश ने एक बहादुर फाइटर पायलट को खोया है जिसने आखिरी सांस तक वर्दी का मान रखा.
कौन थे विंग कमांडर नमांश स्याल?
नमांश स्याल हिमाचल के उन चुनिंदा चेहरों में से थे जिन्होंने कम उम्र में ही एयरफोर्स में खुद को साबित किया. वे हैदराबाद एयरबेस पर तैनात थे और तेजस जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान को उड़ाने वाले अनुभवी पायलटों में उनकी गिनती होती थी. तेजस हल्का लड़ाकू विमान है, जिसे भारत ने खुद विकसित किया है और इसका संचालन केवल अत्यधिक प्रशिक्षित पायलट ही करते हैं.
हैदराबाद की पोस्टिंग के बीच भी स्याल हमेशा अपने गांव, अपनी मिट्टी और अपनी जड़ों से जुड़े रहे. उनके साथियों के अनुसार नमांश बेहद अनुशासित, प्रोफेशनल और शांत स्वभाव के अधिकारी थे. उनकी मुस्कान, विनम्रता और कर्तव्यनिष्ठा उन्हें बाकी अधिकारियों से अलग करती थी.
पति–पत्नी दोनों एयरफोर्स में
नमांश स्याल का परिवार असल में फौजियों का परिवार है. उनके पिता जगन नाथ भारतीय सेना से रिटायर हुए थे और बाद में हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में प्रिंसिपल के पद पर रहे.
उनकी पत्नी अफसान भी भारतीय एयरफोर्स में ऑफिसर हैं. घर में अक्सर ड्यूटी, मिशन और एयरफोर्स लाइफ को लेकर बातचीत होती थी. दोनों फौजी होने के बावजूद एक-दूसरे को पूरा सपोर्ट करते थे. उनकी एक 5 साल की बेटी है, जो अभी इतनी छोटी है कि शायद यह भी नहीं समझ पाई होगी कि उसके साथ क्या हो गया.
हादसे के वक्त स्याल की मां बीना देवी अपने बेटे और बहू से मिलने हैदराबाद गई थीं. जैसे ही उन्हें दुखद खबर मिली, उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया. पूरे परिवार की दुनिया एक पल में टूट गई.
दुबई एयर शो में कैसे हुआ हादसा?
दुबई का 19वां एयर शो दुनिया के सबसे बड़े एविएशन इवेंट्स में से एक है. दुनिया भर के देश अपने सबसे बेहतरीन फाइटर जेट, कार्गो प्लेन, ड्रोन और टेक्नोलॉजी वहां दिखाते हैं. भारत की ओर से तेजस लड़ाकू विमान हिस्सा ले रहा था.
हादसे के दिन विंग कमांडर स्याल तेजस की प्रैक्टिस फ्लाइट पर थे. यह डेमो उड़ान के लिए अंतिम अभ्यास था. इसी दौरान विमान में तकनीकी खराबी आई या क्या हुआ—इसकी जांच अभी जारी है—but कुछ ही सेकंड में फाइटर जेट गिर गया और हादसा इतना भयानक था कि स्याल को बचाया नहीं जा सका.
यह हादसा अचानक और अप्रत्याशित था, इसलिए देश में एयरफोर्स और एविएशन विशेषज्ञों में भी चिंता देखी गई. तेजस की प्रतिष्ठा और सुरक्षा पर सवाल उठे हैं, लेकिन फिलहाल केंद्र की ओर से जांच पूरी होने का इंतजार किया जा रहा है.
गांव में मातम, लोग रातभर बैठे रहे
स्याल के गांव में ऐसा माहौल शायद इससे पहले किसी ने नहीं देखा था. जैसे ही उनके शहीद होने की खबर पहुंची, दर्जनों गांवों से लोग उनके घर के बाहर इकट्ठा हो गए. कोई रो रहा था, कोई खामोश बैठा था, और कोई नम आंखों से बस यही कह रहा था—“कितना होनहार था… देश ने एक सच्चा हीरो खो दिया।”
ठंड के बावजूद लोग देर रात तक स्याल के घर के बाहर बैठे रहे. महिलाएं लगातार परिवार को संभालने की कोशिश कर रही थीं. घर का हर सदस्य टूट चुका था. पिता बार-बार फोटो देख रहे थे और बस इतना कह पा रहे थे—“वह हमेशा कहता था, पापा मैं देश के लिए उड़ता हूं.”
CM सुक्खू और बड़े नेताओं ने जताया दुख
हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सबसे पहले शहीद पायलट के परिवार से संपर्क किया और संवेदना जाहिर की. उन्होंने कहा कि देश ने एक बहादुर, निडर और समर्पित पायलट खो दिया है. सुक्खू ने कहा कि नमांश की शहादत को हमेशा याद रखा जाएगा और हिमाचल को उनके साहस पर गर्व है.
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने भी शोक व्यक्त किया और कहा कि कांगड़ा के इस बेटे की कमी हमेशा महसूस होगी.
विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने एक्स पर लिखा कि यह घटना बेहद दर्दनाक है और शहीद के परिवार के प्रति वह गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं.
हमीरपुर के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी नमांश की मौत को “देश की बड़ी क्षति” बताया.
सैनिक स्कूल से लेकर एयरफोर्स तक का सफर
नमांश स्याल ने हमीरपुर के सैनिक स्कूल सुजानपुर टीरा से पढ़ाई की थी. इस स्कूल का इतिहास ही ऐसा है कि यहां से निकले युवा अधिकांशत: सेना और एयरफोर्स में जाते हैं. शुरुआत से ही नमांश का झुकाव फौज की ओर था. किशोरावस्था में ही उनका सपना था कि वे फाइटर प्लेन उड़ाएं.
स्कूल के शिक्षक बताते हैं कि वह पढ़ाई में अच्छे, खेल-कूद में सक्रिय और बेहद अनुशासित छात्र थे. NCC के दौरान ही उन्हें उड़ान और फौजी जीवन से लगाव हो गया था.
स्कूल से निकलकर उन्होंने एयरफोर्स में दाखिला लिया और तेज रफ्तार, तकनीक और सटीकता की दुनिया में अपनी पहचान बनाई. तेजस जैसे उन्नत विमान को उड़ाना आसान नहीं होता, लेकिन नमांश ने खुद को इस क्षेत्र में साबित किया.
परिवार का दर्द, देश का गर्व
पिता के लिए यह खबर किसी बिजली से कम नहीं थी. एक ओर वह अपने बेटे पर गर्व कर रहे थे, दूसरी ओर इस बात ने दिल तोड़ दिया कि उनका जवान बेटा इतनी जल्दी दुनिया छोड़ गया.
गांव के बुजुर्ग कहते हैं, “कुछ बच्चे अपनी मां–बाप की उम्र बढ़ाते हैं, कुछ बच्चे घर का नाम बढ़ाते हैं. नमांश दोनों करता था.”
गांव की महिलाएं लगातार एक ही बात कहती रहीं—“बहू तो खुद एयरफोर्स में है, कैसे झेल पाएगी ये सब?”
क्या कह रहे लोग?
जमीन पर मौजूद लोग बताते हैं कि पिछले कुछ घंटों में गांव ऐसा लग रहा था जैसे किसी बड़े तूफान ने इसे हिलाकर रख दिया हो. कोई अपने आंसू रोक नहीं पा रहा था.
गांव के एक युवक ने कहा—
“हम बचपन से उसे जानते थे. उसकी मुस्कान अलग थी. इतना शांत बच्चा, इतनी बड़ी जिम्मेदारी… और अब वह हमारे बीच नहीं है.”
एक बुजुर्ग ने कहा—
“हमारे गांव में पहली बार कोई तेजस उड़ाता था. हमने हमेशा सोचा था कि वह एक दिन बहुत बड़ा नाम होगा. वह नाम बना भी गया, लेकिन ऐसी कीमत देकर…”
देश के लिए बड़ा नुकसान
एयरफोर्स के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार नमांश स्याल अपने बैच के सबसे तेज, सबसे काबिल और अत्यंत जिम्मेदार पायलटों में से थे. भविष्य में वे किसी बड़े कमांड पद पर भी आ सकते थे.
तेजस की टीम में उनका होना भारतीय वायुसेना के लिए बड़ी मजबूती थी. उनका जाना केवल परिवार या गांव नहीं, बल्कि एयरफोर्स के लिए भी बड़ी क्षति है.
आने वाले दिनों का इंतजार
श्याल के पार्थिव शरीर को भारत लाने की तैयारियां जारी हैं. जैसे ही अंतिम संस्कार की तिथि तय होगी, हजारों लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचेंगे. गांव ने फैसला किया है कि उनके नाम पर एक स्मारक बनाया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस बहादुर पायलट के साहस को याद रख सकें.
नमांश स्याल का नाम हमेशा अमर रहेगा
विंग कमांडर स्याल ने छोटी-सी उम्र में वह कर दिखाया जो हर कोई नहीं कर पाता. उन्होंने देश की सेवा करते हुए प्राण त्यागे. अपनी वर्दी, अपनी जिम्मेदारी और अपने देश के प्रति निष्ठा को अंतिम पल तक निभाया.
Dubai-Airshow दुबई एयर शो में देश का बहादुर पायलट शहीद: पिता आर्मी से रिटायर, पत्नी एयरफोर्स अफसर… कांगड़ा का गांव सदमे में डूबा
हिमाचल का यह बेटा अब नहीं रहा, लेकिन उसका साहस, उसकी उड़ान और उसका नाम हमेशा आसमान में गूंजता रहेगा.
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